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#om shanti brahmakumari
om shanti   brahmakumari - वरदानः- किसी की कमी , कमजोरी को न देख अपने गुण व शक्तियों का सहयोग देने वाले मास्टर दाता भव वह है जो सदा इसी रूहानी भावना में रहते कि मास्टर दाता सर्व रूहें हमारे समान वर्से के अधिकारी बन जायें। किसी किये हुए की भी कमी कमजोरी को न देख, वे अपने धारण गुणों का, शक्तियों का सहयोग देते हैं | यह ऐसा है ही-इस भावना के बजाए मैं इसको भी बाप समान बनाऊं , यह शुभ  साथ-्साथ यही श्रेष्ठ कामना हो कि यह सर्व भावना हो आत्मायें कंगाल , दुःखी , अशान्त से सदा शान्त , सुख- रूप, मालामाल बन जाएं तब कहेंगे मास्टर दाता | स्लोगनः- मन्सा-वाचा-कर्मणा सेवा करने वाले ही निरन्तर सेवाधारी हैं, उनके हर श्वांस में सेवा समाई 85 ೯ / शुभ विचारः आपके पास श्रेष्ठ भाग्य की रेखा खींचने की श्रेष्ठ कर्म। राजयोग का अभ्यास ही श्रेष्ठ कर्म कलम है का आधार है। इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह इशारे अव्यक्त जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो  पहले अपनी देह से, देह के सम्बन्ध से और पुरानी दुनिया की स्मृति से मुक्त बनो। जब इस मुक्ति की अवस्था का अनुभव करेंगे तब मुक्त होने के बाद जीवन मुक्ति का अनुभव स्वतः होगा| तो चेक करो जीवन में रहते हुए देह, देह के सम्बन्ध और पुरानी दुनिया की आकर्षण से कहाँ तक मुक्त बने हैं ? वरदानः- किसी की कमी , कमजोरी को न देख अपने गुण व शक्तियों का सहयोग देने वाले मास्टर दाता भव वह है जो सदा इसी रूहानी भावना में रहते कि मास्टर दाता सर्व रूहें हमारे समान वर्से के अधिकारी बन जायें। किसी किये हुए की भी कमी कमजोरी को न देख, वे अपने धारण गुणों का, शक्तियों का सहयोग देते हैं | यह ऐसा है ही-इस भावना के बजाए मैं इसको भी बाप समान बनाऊं , यह शुभ  साथ-्साथ यही श्रेष्ठ कामना हो कि यह सर्व भावना हो आत्मायें कंगाल , दुःखी , अशान्त से सदा शान्त , सुख- रूप, मालामाल बन जाएं तब कहेंगे मास्टर दाता | स्लोगनः- मन्सा-वाचा-कर्मणा सेवा करने वाले ही निरन्तर सेवाधारी हैं, उनके हर श्वांस में सेवा समाई 85 ೯ / शुभ विचारः आपके पास श्रेष्ठ भाग्य की रेखा खींचने की श्रेष्ठ कर्म। राजयोग का अभ्यास ही श्रेष्ठ कर्म कलम है का आधार है। इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह इशारे अव्यक्त जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो  पहले अपनी देह से, देह के सम्बन्ध से और पुरानी दुनिया की स्मृति से मुक्त बनो। जब इस मुक्ति की अवस्था का अनुभव करेंगे तब मुक्त होने के बाद जीवन मुक्ति का अनुभव स्वतः होगा| तो चेक करो जीवन में रहते हुए देह, देह के सम्बन्ध और पुरानी दुनिया की आकर्षण से कहाँ तक मुक्त बने हैं ? - ShareChat