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#📝कविता / शायरी/ चारोळी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - जिंदगी भी कितनी अजीब है , लगती है ठीक हो सब तब सुहावनी जब जब बिखर जाती है तब डरावनी लगती है जो साथ हो कोई तो आस्तान लगती है अकेले हो तुम तो परेशान लगती है जब में स्ताथ हो कोईतो जब खुशी  को सौ गुना और बढा देती है खुशी : वहीं जब गम में कोई अपना ना दिखे उन छोटे से गमों को भी पहाड़ बना देती है। जिंदगी भी कितनी अजीब है , लगती है ठीक हो सब तब सुहावनी जब जब बिखर जाती है तब डरावनी लगती है जो साथ हो कोई तो आस्तान लगती है अकेले हो तुम तो परेशान लगती है जब में स्ताथ हो कोईतो जब खुशी  को सौ गुना और बढा देती है खुशी : वहीं जब गम में कोई अपना ना दिखे उन छोटे से गमों को भी पहाड़ बना देती है। - ShareChat