ShareChat
click to see wallet page
search
#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - 66 ঐভ यूँ तो कटे हुए उस को एक ज़माना हो गया ढूंढ़ने अपना ठिकाना मगर रोज़ परिंदा आता है ...!! 0 66 ঐভ यूँ तो कटे हुए उस को एक ज़माना हो गया ढूंढ़ने अपना ठिकाना मगर रोज़ परिंदा आता है ...!! 0 - ShareChat