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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - चलो आज अपनी कहानी : ٤ सुनाती ' कैसी हूँ मैं तुम्हें ये बताती हूँ? करती हूँ पर प्यार भी जताती हूँ, बखूबी ; गु़स्सा अच्छों के साथ अच्छी और बुरों के साथ बुरी बन जाती हैं। समझदारों का तो पता नहीं पर नेक दिल वालों की गिनती में जरुर आती हूँ। चालाकी का पता नहीं पर अच्छे बुरे का भेद पहचान जाती हूँ। करे कोई बुरा तो उसे कोसती नहीं, हाँ झट अपनी जिंदगी से निकाल आती हूँ। चलो आज अपनी कहानी : ٤ सुनाती ' कैसी हूँ मैं तुम्हें ये बताती हूँ? करती हूँ पर प्यार भी जताती हूँ, बखूबी ; गु़स्सा अच्छों के साथ अच्छी और बुरों के साथ बुरी बन जाती हैं। समझदारों का तो पता नहीं पर नेक दिल वालों की गिनती में जरुर आती हूँ। चालाकी का पता नहीं पर अच्छे बुरे का भेद पहचान जाती हूँ। करे कोई बुरा तो उसे कोसती नहीं, हाँ झट अपनी जिंदगी से निकाल आती हूँ। - ShareChat