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##ब्रेकिंग न्यूज़🙏
#ब्रेकिंग न्यूज़🙏 - अब जाति नहीं , मेरिट जरूरी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने काअधिकार  नयी दिल्ली ( एजेंसी ) ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव नहीं देताः बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार  जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है जिसका सोधा असर  केस का हवाला देते हुए कहा, ओपन कैटेगरी में आने आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है ।यह मामला  सरकारी नौकरियों को भर्ता प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पडता है। कोर्ट ने साफ किया है कि॰ राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त २०२२ मेंहाईकोर्टने २७५६ पदों ( जूनियरज्यूडिशियल असिस्टेंट जनरल या ओपन केटेगरी किसी जाति के लिए नही बल्कि मेरिट के लिए होती है।अगर कोई आरक्षित वर्ग और क्लर्कग्रेड- ।I) केलिए भती निकाली थी।लिखित का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट ऑफ  परीक्षा के बाद मई २०२३ में जब नतीजे आए तो एससी  ओबीसी , एमबीसी और ईडब्ल्यूएस का कट ऑफ * सेज्यादा नंबर लाता है॰तो उसे जनरल केटेगरी की सीट परही माना जाएगा जनरल से ज्यादा निकल गया| कुछ आरक्षित वर्ग के कोर्टने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी  उम्मीदवारों जनरल कट ऑफ पार कियाः लेकिन सुप्रीम सभी के लिए खुली होती है॰ चाहे वह किसी भी जाति अपनी कैरेगरी का कट ऑफ न होने के कारण उन्हे अगर एसी॰ ओबीसी   एमबीसी अगले राउंड से बाहर कर दिया गया ।इन उम्मीदवारों याव्गका हो राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि॰ ईडब्लूएस का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित जनरल लिस्ट में रशामिल किया जाएगा नकि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा ।कोर्ट ने यह भी कहा लिस्ट में नहीं रखा जा सकता  अब दिसंबर २०२५ में कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का सुप्रीम कोर्ट नेभी इसी फैसले को सही ठहराते सारिज्हकत दीए की एक ही शर्त है॰ मेरिट | यह नहीं देखा जाएगा कि॰ कट ऑफ जनरल सेज्यादा चला जाता हे।ऐसीं स्थिति राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट  उम्मीदवार किस वर्ग सेहै ।कोर्टने यह दलोल भी खारिज जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट ऑफ पार कर लेता है॰तो उसे बाहर करना गलत है।कोर्ट  की कैटेगरी है आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना कर दी कि ऐसो उग्मीदवारों को रशामल करने से उन्हें ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्वड शब्द का डबल फायदा मिलेगा | साफ कहा गया कि अगर कोई छूट जनरल कट- ऑफ पार करता हैतो वह जनरल सीट  मतलब है - सभी के लिए खुला | यह किसी खास जाति पर ही जाएगा इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार  रियायत नहीं लो गई है तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता | सुप्रीम कोर्ट  नहीं छिने बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है।  है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति अब जाति नहीं , मेरिट जरूरी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला जनरल कैटेगरी के आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से लिख देना अपने आप में आरक्षित सीट पाने काअधिकार  नयी दिल्ली ( एजेंसी ) ने अपने पुराने फैसलोंइंद्रा साहनी केस और सौरव यादव नहीं देताः बल्कि सिर्फ यह बताता है कि उम्मीदवार  जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया है जिसका सोधा असर  केस का हवाला देते हुए कहा, ओपन कैटेगरी में आने आरक्षित सूची में भी दावेदार हो सकता है ।यह मामला  सरकारी नौकरियों को भर्ता प्रक्रिया और जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों पर पडता है। कोर्ट ने साफ किया है कि॰ राजस्थान हाईकोर्ट की भर्ती से जुड़ा था। अगस्त २०२२ मेंहाईकोर्टने २७५६ पदों ( जूनियरज्यूडिशियल असिस्टेंट जनरल या ओपन केटेगरी किसी जाति के लिए नही बल्कि मेरिट के लिए होती है।अगर कोई आरक्षित वर्ग और क्लर्कग्रेड- ।I) केलिए भती निकाली थी।लिखित का उम्मीदवार बिना किसी छूट के जनरल कट ऑफ  परीक्षा के बाद मई २०२३ में जब नतीजे आए तो एससी  ओबीसी , एमबीसी और ईडब्ल्यूएस का कट ऑफ * सेज्यादा नंबर लाता है॰तो उसे जनरल केटेगरी की सीट परही माना जाएगा जनरल से ज्यादा निकल गया| कुछ आरक्षित वर्ग के कोर्टने कहा कि ओपन या जनरल कैटेगरी  उम्मीदवारों जनरल कट ऑफ पार कियाः लेकिन सुप्रीम सभी के लिए खुली होती है॰ चाहे वह किसी भी जाति अपनी कैरेगरी का कट ऑफ न होने के कारण उन्हे अगर एसी॰ ओबीसी   एमबीसी अगले राउंड से बाहर कर दिया गया ।इन उम्मीदवारों याव्गका हो राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा कि॰ ईडब्लूएस का उम्मीदवार बिना किसी रियायत के जनरल पहले जनरल लिस्ट सिर्फ मेरिट के आधार पर बननी कैटेगरी के उम्मीदवारों से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे चाहिए और जो उसमें आ जाएं उन्हें अलग से आरक्षित जनरल लिस्ट में रशामिल किया जाएगा नकि उसकी आरक्षित कैटेगरी में बांधा जाएगा ।कोर्ट ने यह भी कहा लिस्ट में नहीं रखा जा सकता  अब दिसंबर २०२५ में कि कई बार भर्ती में देखा गया है कि आरक्षित वर्ग का सुप्रीम कोर्ट नेभी इसी फैसले को सही ठहराते सारिज्हकत दीए की एक ही शर्त है॰ मेरिट | यह नहीं देखा जाएगा कि॰ कट ऑफ जनरल सेज्यादा चला जाता हे।ऐसीं स्थिति राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन की अपील में अगर आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार जनरल कट  उम्मीदवार किस वर्ग सेहै ।कोर्टने यह दलोल भी खारिज जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि मेरिट ऑफ पार कर लेता है॰तो उसे बाहर करना गलत है।कोर्ट  की कैटेगरी है आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार अगर बिना कर दी कि ऐसो उग्मीदवारों को रशामल करने से उन्हें ने दोहराया कि जनरल, ओपन या अनरिजर्वड शब्द का डबल फायदा मिलेगा | साफ कहा गया कि अगर कोई छूट जनरल कट- ऑफ पार करता हैतो वह जनरल सीट  मतलब है - सभी के लिए खुला | यह किसी खास जाति पर ही जाएगा इससे जनरल उम्मीदवारों के अधिकार  रियायत नहीं लो गई है तो यह कोई अतिरिक्त लाभ नहीं वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित नहीं होता | सुप्रीम कोर्ट  नहीं छिने बल्कि मेरिट का नियम मजबूत हुआ है।  है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म में अपनी जाति - ShareChat