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#📓 हिंदी साहित्य #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍️ साहित्य एवं शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
📓 हिंदी साहित्य - उड़े हवाओं में शहरें ज़मी नहीं पहुंचे जहाँ पहुँचना था हमको वहीं नहीं पहुंचे जाने किसकी उम्र लग गई थी पैरों को तमाम उम्र चले और कहीं नहीं पहुंचे उड़े हवाओं में शहरें ज़मी नहीं पहुंचे जहाँ पहुँचना था हमको वहीं नहीं पहुंचे जाने किसकी उम्र लग गई थी पैरों को तमाम उम्र चले और कहीं नहीं पहुंचे - ShareChat