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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून #🌹प्रेमरंग #🥰प्रेम कविता📝 #📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - मनुवादी ढोंगी बाबाओ के मन मे नफरत से भरी गंदगी ही गंदगी है। मलमूत्र मे गुजरने वाले মানত सूअर जैसी उनकी जिंदगी है।। उनका मन सबसे अशांत है मन मे शांती है ना किसी के लिए प्यार है। इन नफरती से सदा परेशान हैरान इनका धर्म इनका का परिवार है।। hansraj मनुवादी ढोंगी बाबाओ के मन मे नफरत से भरी गंदगी ही गंदगी है। मलमूत्र मे गुजरने वाले মানত सूअर जैसी उनकी जिंदगी है।। उनका मन सबसे अशांत है मन मे शांती है ना किसी के लिए प्यार है। इन नफरती से सदा परेशान हैरान इनका धर्म इनका का परिवार है।। hansraj - ShareChat