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#ધર્મ અને અધ્યાત્મ #...જય‌ શ્રી રામ...
ધર્મ અને અધ્યાત્મ - श्री रामचरित मानस चौपाई I। सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं 1 जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं II जैसे ही जीव मेरे ( भगवान के ) सम्मुख होता है, वैसे ही उसके करोड़ों जन्मों के पाप उसी क्षण नष्ट हो जाते हैं श्री रामचरित मानस चौपाई I। सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं 1 जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं II जैसे ही जीव मेरे ( भगवान के ) सम्मुख होता है, वैसे ही उसके करोड़ों जन्मों के पाप उसी क्षण नष्ट हो जाते हैं - ShareChat