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#love Shayriya
love Shayriya - रमज़ान से सीखिए (३) रमजानुल मुबारक में मुसलमानों के सामने अपनी ड़बादतें सब से ज़्यादा अहमियत वाली हो जाती हैं , बाक़ी  दुनिया के उमूर और काम ज़रूरत के दर्जे पर आ जाते हैं , इस लिए कोशिश की जाती है कि तमाम कामों को इस तरह एडजेस्ट किया जाए कि उन की वजह से रोज़े तरावीह और नमाज़ों में खलल ना आए। और आसानी से ऐसा अ़मल हो जाता है। यह सिर्फ रमज़ान का तकाज़ा नहीं , बल्कि हमें अपनी पूरी ज़िंदगी ऐसे गुज़ारनी चाहिए कि बुनियादी तौर पर हम अल्लाह तड़ला के बंदे और ग़ुलाम हों और दुनिया के काम काज ज़रूरत के बक़द्र करने वाले हों। Mufti Saifullah Taunsvi हिन्दी तर्जुमा व तसहीलः अल्तमश आलम क़ासमी Basheerululoom Deenirahnumayi blogspot com रमज़ान से सीखिए (३) रमजानुल मुबारक में मुसलमानों के सामने अपनी ड़बादतें सब से ज़्यादा अहमियत वाली हो जाती हैं , बाक़ी  दुनिया के उमूर और काम ज़रूरत के दर्जे पर आ जाते हैं , इस लिए कोशिश की जाती है कि तमाम कामों को इस तरह एडजेस्ट किया जाए कि उन की वजह से रोज़े तरावीह और नमाज़ों में खलल ना आए। और आसानी से ऐसा अ़मल हो जाता है। यह सिर्फ रमज़ान का तकाज़ा नहीं , बल्कि हमें अपनी पूरी ज़िंदगी ऐसे गुज़ारनी चाहिए कि बुनियादी तौर पर हम अल्लाह तड़ला के बंदे और ग़ुलाम हों और दुनिया के काम काज ज़रूरत के बक़द्र करने वाले हों। Mufti Saifullah Taunsvi हिन्दी तर्जुमा व तसहीलः अल्तमश आलम क़ासमी Basheerululoom Deenirahnumayi blogspot com - ShareChat