#holi होलिकोत्सव (होलिका दहन महोत्सव) की समस्त भक्तों को वैष्णवों को मङ्गल बधाईयां।
"रामनाम जपतां कुतो भयं
सर्वतापशमनैकभेषजम्।
पश्य तात मम गात्रसन्निधौ
पावकोऽपि सलिलायतेऽधुना।।"
(श्रीनृसिंह पुराण)
भक्तशिरोमणि श्रीप्रह्लादजी धधकती चिता पर बैठे निर्भीक होकर अपने पिता हिरण्यकशिपु से कहते हैं:-
श्रीराम नाम के जपने वाले को भला भय कहाँ हो सकता है; क्योंकि सभी प्रकार के आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक तापों को शमन करने वाला रामनामरूपी महारसायन है, उसके पान करके वाले के पास भला ताप आ ही कैसे सकते हैं? हे पिताजी ! प्रत्यक्ष के लिये प्रमाण क्या? आप देखते नहीं, मेरे शरीर के अंगों के समीप आते ही उष्ण-स्वभाव की अग्नि भी जल के समान शीतल हो गयी (अर्थात वह मेरे शरीर को जला ही न सकी)। राम-नाम का ऐसा ही माहात्म्य है।
जय गोमाता जय गोपाल


