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#GodNightTuesday गरीब, पांच पचीसों भून करि, बिरह अगनि तन जार। सो अविनासी ब्रह्म है, खेले अधर अधार।। सरलार्थ:- शरीर की प्रकृतियों को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। ##GodNightTuesday
#GodNightTuesday - cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI cB1a3 z12] {3e गरब॰ पांच पचओं भूतु करि Gufஎ ~573 ओ टअविताशी ब्रह्य है खेले ८३ध३ ८धा३७ 45 सरलार्थ को परमात्मा प्राप्ति की तड़फ रूपी शरीर की प्रकृतियों अग्नि में जलाकर दृढ़ रहे, वह अमरत्व प्राप्त करता है। वह जीव ब्रह्म (पीव) के गुणों युक्त अमर हो जाता है। वह सर्वोपरि स्थान सतलोक में आनन्द से रहता है अधर ्आधार यानि (खेलता है) यानि मौज- मस्ती करता है। -जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज SANT RAMPAL JI SPIRITUAL LEADER 0 @SAITRAMPAUIM SUPREMEGODORG MAHARAJ SAINT RAMPAL JI - ShareChat