ShareChat
click to see wallet page
search
#कबीर अमृत वाणी🙏🙏
कबीर अमृत वाणी🙏🙏 - बीर वाणा- कबीर , माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर | कर का मनका डार 4 मन का मनका फेर। । भावार्थः कबीर जी अपनी उपरोक्त वाणी के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो लम्बे समय तक हाथ में माला तो घमाते है॰ पर उनके मन cht की नहीं बदलता, उनके मन भाव नहीं होती। शांत ৪লখলে कबीर जी ऐसे व्यक्ति को कहते हैं कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन को आडंबरों सांसारिक से हटाकर भक्ति में लगाओ। बीर वाणा- कबीर , माला फेरत जुग भया , फिरा न मन का फेर | कर का मनका डार 4 मन का मनका फेर। । भावार्थः कबीर जी अपनी उपरोक्त वाणी के माध्यम से उन लोगों पर कटाक्ष कर रहे हैं जो लम्बे समय तक हाथ में माला तो घमाते है॰ पर उनके मन cht की नहीं बदलता, उनके मन भाव नहीं होती। शांत ৪লখলে कबीर जी ऐसे व्यक्ति को कहते हैं कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन को आडंबरों सांसारिक से हटाकर भक्ति में लगाओ। - ShareChat