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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - सोचकर बाजार गया था अपने कुछ आंसू बेचने, हर खरीददार बोला अपनों के दिए तोहफे बेचा 7844..! सोचकर बाजार गया था अपने कुछ आंसू बेचने, हर खरीददार बोला अपनों के दिए तोहफे बेचा 7844..! - ShareChat