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#कबीर अमृतवाणी🥀🍀
कबीर अमृतवाणी🥀🍀 - मल मल धोये शरीर को। धुला न मन का मैल।। गंगा नहाये या गोमती| रहा बैल का बैल।| जन्म सन 1४०२ qfeHq Ralrsh Sariyala मृत्यु सन १५१८ 72 मल मल धोये शरीर को। धुला न मन का मैल।। गंगा नहाये या गोमती| रहा बैल का बैल।| जन्म सन 1४०२ qfeHq Ralrsh Sariyala मृत्यु सन १५१८ 72 - ShareChat