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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - 2233 ज़हर का भी अपना हिसाब है मरने के लिए थोड़ा सा fag और जीने के बहुत सारा पीना पडता है 2233 ज़हर का भी अपना हिसाब है मरने के लिए थोड़ा सा fag और जीने के बहुत सारा पीना पडता है - ShareChat