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#✡️ज्योतिष समाधान 🌟
✡️ज्योतिष समाधान 🌟 - पापमोचिनी एकादशी २०२६ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि १४ पंचांग के अनुसार चैत्र बजे से शुरू होकर २५ मार्च सुबह मार्च सुबह 8:२0 9.16 * रहेगी। उदयातिथि के अनुसार पापमोचिनी एकादशी व्रत २५ तक मार्च २०२६ (रविवार) को रखा जाएगा। व्रत पारण का समयः २६ मार्च सुबह ६:३० बजे से ८:५४ बजे के बीच करना शुभ रहेगा। शुभ योगः इस दिन परिघ योग, शिव योग और द्विपुष्कर योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ है। माना जाता २. परिघ योग - प्रातःकाल से सुबह २०:२५ बजे तक। इस योग में करने से बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। পুতা २.शिव योग - सुबह १०:२५ बजे से रात तक। यह बहुत शुभ योग माना जाता है, इस समय भगवान विष्णु की पूजा से सुख- शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। ३.द्विपुष्कर योग - १६ मार्च सुबह ०५:५६ बजे से ०६:३० बजे इस योग में किए गए पूजा पाठ और दान का फल कई गुना గగ] बढ़ जाता है। पूजा विधिः सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। गर संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थान पर स्नान करना अधिक शुभ सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान माना जाता है। स्नान के बाद विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या किसी मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान गंगाजल, चंदन , रोली, फूल, धूप, दीप, फल और ೯೯; मिष्ठान अर्पित करें। एकादशी कथा सुनें और अंत में आरती करें। धार्मिक महत्वः मान्यता है कि पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने अनजाने पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख ्शांति और समृद्धि आती है। हर हर महादेव follow us पापमोचिनी एकादशी २०२६ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि १४ पंचांग के अनुसार चैत्र बजे से शुरू होकर २५ मार्च सुबह मार्च सुबह 8:२0 9.16 * रहेगी। उदयातिथि के अनुसार पापमोचिनी एकादशी व्रत २५ तक मार्च २०२६ (रविवार) को रखा जाएगा। व्रत पारण का समयः २६ मार्च सुबह ६:३० बजे से ८:५४ बजे के बीच करना शुभ रहेगा। शुभ योगः इस दिन परिघ योग, शिव योग और द्विपुष्कर योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ है। माना जाता २. परिघ योग - प्रातःकाल से सुबह २०:२५ बजे तक। इस योग में करने से बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। পুতা २.शिव योग - सुबह १०:२५ बजे से रात तक। यह बहुत शुभ योग माना जाता है, इस समय भगवान विष्णु की पूजा से सुख- शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। ३.द्विपुष्कर योग - १६ मार्च सुबह ०५:५६ बजे से ०६:३० बजे इस योग में किए गए पूजा पाठ और दान का फल कई गुना గగ] बढ़ जाता है। पूजा विधिः सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। गर संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थान पर स्नान करना अधिक शुभ सूर्य देव को अर्घ्य दें और भगवान माना जाता है। स्नान के बाद विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर या किसी मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान गंगाजल, चंदन , रोली, फूल, धूप, दीप, फल और ೯೯; मिष्ठान अर्पित करें। एकादशी कथा सुनें और अंत में आरती करें। धार्मिक महत्वः मान्यता है कि पापमोचिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जाने अनजाने पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख ्शांति और समृद्धि आती है। हर हर महादेव follow us - ShareChat