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#श्रीमद्भागबतम् #🏘 म्हारो राजस्थान🙏 #🥰हरे राम हरे कृष्णा🤩 #🙏सद्गुरु के विचार #👆प्रेरणादायी बातें @ShareChat Hindi @ShareChat Telugu @शेअरचॅट मराठी @ShareChat Gujarati @ShareChat ਪੰਜਾਬੀ
श्रीमद्भागबतम् - श्रीमद्भागबतम् १.९.३३ त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं रविकरगौरवराम्बरं दधाने 1 वपुरलककुलावृताननाब्ज रतिरस्तु विजयसखे मेडनवद्या II ३३ II Synonyms त्रि-भुवन - तीनों लोक; कमनम् - अभीष्ट; तमाल ्वर्णम् तमालवृक्ष जैसे नीले रंगवाले; रवि-कर - सूर्य की किरणों वाला; qea కౌౌ; चमचमाता वस्त्रः दधाने ; गौर - सुनहरा IIRH वपुः - शरीरः अलक ्कुल आवृत चन्दन की रचना से आवृत; कमल के समान मुखः विजय सखे - अर्जुन के अनन अब्जम् मित्र में; रतिः अस्तु - आसक्ति हो; मे -मेरी; अनवद्या- फल की इच्छा से रहित, निष्काम। Translation वे इस श्रीकृष्ण अर्जुन के घनिष्ठ मित्र हैं। धरा पर अपने दिव्य शरीर सहित प्रकट हुए हैं, जो तमाल वृक्ष सदृश नीले रंग का है। उनका शरीर तीनों लोकों (उच्च, मध्य तथा अघोलोक ) में हर एक को आकृष्ट करनेवाला है। उनका चमचमाता पीताम्बर तथा चन्दनचर्चित मुखकमल मेरे आकर्षण का विषय बने और मैं किसी प्रकार के फल की इच्छा न करूँ / श्रीमद्भागबतम् १.९.३३ त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं रविकरगौरवराम्बरं दधाने 1 वपुरलककुलावृताननाब्ज रतिरस्तु विजयसखे मेडनवद्या II ३३ II Synonyms त्रि-भुवन - तीनों लोक; कमनम् - अभीष्ट; तमाल ्वर्णम् तमालवृक्ष जैसे नीले रंगवाले; रवि-कर - सूर्य की किरणों वाला; qea కౌౌ; चमचमाता वस्त्रः दधाने ; गौर - सुनहरा IIRH वपुः - शरीरः अलक ्कुल आवृत चन्दन की रचना से आवृत; कमल के समान मुखः विजय सखे - अर्जुन के अनन अब्जम् मित्र में; रतिः अस्तु - आसक्ति हो; मे -मेरी; अनवद्या- फल की इच्छा से रहित, निष्काम। Translation वे इस श्रीकृष्ण अर्जुन के घनिष्ठ मित्र हैं। धरा पर अपने दिव्य शरीर सहित प्रकट हुए हैं, जो तमाल वृक्ष सदृश नीले रंग का है। उनका शरीर तीनों लोकों (उच्च, मध्य तथा अघोलोक ) में हर एक को आकृष्ट करनेवाला है। उनका चमचमाता पीताम्बर तथा चन्दनचर्चित मुखकमल मेरे आकर्षण का विषय बने और मैं किसी प्रकार के फल की इच्छा न करूँ / - ShareChat