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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - एक पल नहीं लगता इस दुनियां से विदा होने में॰ । फ़िर भी कितना ग़ुरूर है आदमी को आदमी होने में,। एक पल नहीं लगता इस दुनियां से विदा होने में॰ । फ़िर भी कितना ग़ुरूर है आदमी को आदमी होने में,। - ShareChat