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#gurbani kirtan
gurbani kirtan - आपे माछी मछुली , आपे पाणी जालु। आपे जाल मणकड़ा , आपे अंदर लालु II यह संसार एक मायाजाल है जिसे परमात्मा ने स्वयं ही रचा जीव (आत्मा) उस जाल में फँसी मछली की तरह है, 8 लेकिन जाल और पानी भी ईश्वर ही हैं। यह गुरु उपदेश है कि ही हर तरह से सर्वत्र व्याप्त है और सभी तरह के परमात्मा रूपों में खेल (अटखेलियां) कर रहा है। गुरु नानक देव उम्दा पंक्तियां आपे माछी मछुली , आपे पाणी जालु। आपे जाल मणकड़ा , आपे अंदर लालु II यह संसार एक मायाजाल है जिसे परमात्मा ने स्वयं ही रचा जीव (आत्मा) उस जाल में फँसी मछली की तरह है, 8 लेकिन जाल और पानी भी ईश्वर ही हैं। यह गुरु उपदेश है कि ही हर तरह से सर्वत्र व्याप्त है और सभी तरह के परमात्मा रूपों में खेल (अटखेलियां) कर रहा है। गुरु नानक देव उम्दा पंक्तियां - ShareChat