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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #💝 शायराना इश्क़
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ShareChat नवाब कभी मासूमियत इतनी थी,, कि "हर चीज़" पर भरोसा था.| "तजुर्बा" इतना है,, ঔন कि " सच्चाई" पर भी यक़ीन नहीं होता. ! ShareChat नवाब कभी मासूमियत इतनी थी,, कि "हर चीज़" पर भरोसा था.| "तजुर्बा" इतना है,, ঔন कि " सच्चाई" पर भी यक़ीन नहीं होता. ! - ShareChat