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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - अरे यार अब तो झांसे से बाहर आओगे? कहां गये वो अच्छे दिन२ अब पढ़ा न पाओगे भक्त बने जो आगे पीछे घूम रहे हैं आज करो यक़ीन उन्हीं से इक दिन धोखा खाओगे तुम्हें ग़लतफ़हमी है, पैसे वाले किसके यार? मगर ग़रीब हुआ खुश तो फिर दिल्ली जाओगे सजने और संवरने के दिन हैं अभी तुम्हारे कभी आइने से नज़रें भी मिला न पाओगे बहुत कर लिया झूठ की खेती  4R तुमने समय हाथ से निकल गया तो कल पछताओगे निरा किसान समझते हो जो सबका पालनहार कटे जो उसके हाथ तो सब भूखे मर जाओगे अरे यार अब तो झांसे से बाहर आओगे? कहां गये वो अच्छे दिन२ अब पढ़ा न पाओगे भक्त बने जो आगे पीछे घूम रहे हैं आज करो यक़ीन उन्हीं से इक दिन धोखा खाओगे तुम्हें ग़लतफ़हमी है, पैसे वाले किसके यार? मगर ग़रीब हुआ खुश तो फिर दिल्ली जाओगे सजने और संवरने के दिन हैं अभी तुम्हारे कभी आइने से नज़रें भी मिला न पाओगे बहुत कर लिया झूठ की खेती  4R तुमने समय हाथ से निकल गया तो कल पछताओगे निरा किसान समझते हो जो सबका पालनहार कटे जो उसके हाथ तो सब भूखे मर जाओगे - ShareChat