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पौराणिक मान्यताओं और लोक कथाओं के अनुसार, होली का सबसे सुंदर और दिव्य स्वरूप ब्रज की होली को ही माना जाता है। यह मान्यता काफी गहरी है कि रंगों वाली होली की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम से हुई थी। यहाँ इस परंपरा से जुड़ी कुछ खास बातें हैं: 1. रंग और प्रेम का आरंभ कहा जाता है कि नटखट कृष्ण को इस बात की चिंता थी कि उनका रंग सांवला है और राधा जी बहुत गोरी हैं। तब माता यशोदा ने उन्हें सुझाव दिया कि वे जो चाहें वह रंग राधा जी के चेहरे पर लगा सकते हैं। कान्हा ने ऐसा ही किया, और यहीं से एक-दूसरे को रंग लगाने की परंपरा शुरू हुई जिसने बाद में 'होली' का रूप ले लिया। 2. ब्रज की विरासत आज भी मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। वहाँ इसे केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। 3. सांस्कृतिक महत्व भले ही 'होली' का पौराणिक संबंध भक्त प्रहलाद और होलिका दहन (बुराई पर अच्छाई की जीत) से भी है, लेकिन उत्सव में जो रंग, गुलाल और उल्लास है, उसका पूरा श्रेय राधा-कृष्ण की लीलाओं को ही जाता है। जय श्री राधे कृष्णा जी #भक्ति 🙏💫
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