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स्वामी विवेकानंद जी की फोटो - भरत त्याग सेवा और घर्म का शाश्वत आर्दर्श उमा शंकर व्यास अमित चावला  लखनऊ | स्वामी विवेकानन्द  को १६४वीं जन्मतिथि समारोह आयोजित 9 दिवसीय कार्यक्रम बडे ही हर्षोल्लास क साथ रामकृष्ण मठ में ननाई जा रही है इसी कम कार्यक्रम क चौथे दिन सायकाल की संध्यारति के उपरांत ठाकुरजी  हनुमान चालीसा का पाठ हुआ उसके  पश्चात रामकृष्ण मठ, निराला नगर प्रेक्षागृह मे आयोजित श्री रामचारित  मानस ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ करते हुए श्री रान किंकर के पट्ट शिष्य कथाऋषि श्री उमा शंकर च्यास जी Lucknow राम राज्य क आधार शरीो भरत जी पर प्रवचन देते हुए श्रोताओं  44 को बताया किराम चरित मानस भी भरत जी का चरित्र अतिम है সাণন ননামা কি সত মা তীন্র কিমা शरष्ठ  राज्य रको कल्पना की जाती हे तो वह रामराज्य ही है जिसके मूल  को स्थापना में श्री जी ಭYr chl जोवन ओर उनकी रहनी ही मुख्य  मुक्तिनाथानन्द ने॰श्री॰ [ాగా है।कथा व्यास कहते है कि॰श्री भरत है। इसो लिए कहा गया है कियदि राम जो का जो त्याग है वह तो सराहनीय  पट्ट शिष्य कथाऋषि उमा शकर व्यास श्री भरत का जन्म न हुआ होता तो ক্রী ধ্ুংা কা जी काश्री रामचारित मानस ज्ञान यज्ञ हे॰ही उनका जीवन किसो भी समाज समस्त   धमों l1 का शुभारन्भ करने के लिए घन्यवाद  को आदर्श बना देने की पूर्ण क्षमता घारण करता भरत जीःका चरित्र एक अभिवादन  किया।  श्री भरत काजो चिन्तन है ऐसा आर्दश चरित्र है कि जिन भगवान रखता हे उनका अत उपस्थित भक्तगणाक बीचं प्रसाद वितरण  राम का नाम जप करके संतुष्ट होते  वह श्री अयोध्या को विश्व पटल पर सूर्य की किरणों के प्रकाश की भौँति है। रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ भरत त्याग सेवा और घर्म का शाश्वत आर्दर्श उमा शंकर व्यास अमित चावला  लखनऊ | स्वामी विवेकानन्द  को १६४वीं जन्मतिथि समारोह आयोजित 9 दिवसीय कार्यक्रम बडे ही हर्षोल्लास क साथ रामकृष्ण मठ में ननाई जा रही है इसी कम कार्यक्रम क चौथे दिन सायकाल की संध्यारति के उपरांत ठाकुरजी  हनुमान चालीसा का पाठ हुआ उसके  पश्चात रामकृष्ण मठ, निराला नगर प्रेक्षागृह मे आयोजित श्री रामचारित  मानस ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ करते हुए श्री रान किंकर के पट्ट शिष्य कथाऋषि श्री उमा शंकर च्यास जी Lucknow राम राज्य क आधार शरीो भरत जी पर प्रवचन देते हुए श्रोताओं  44 को बताया किराम चरित मानस भी भरत जी का चरित्र अतिम है সাণন ননামা কি সত মা তীন্র কিমা शरष्ठ  राज्य रको कल्पना की जाती हे तो वह रामराज्य ही है जिसके मूल  को स्थापना में श्री जी ಭYr chl जोवन ओर उनकी रहनी ही मुख्य  मुक्तिनाथानन्द ने॰श्री॰ [ాగా है।कथा व्यास कहते है कि॰श्री भरत है। इसो लिए कहा गया है कियदि राम जो का जो त्याग है वह तो सराहनीय  पट्ट शिष्य कथाऋषि उमा शकर व्यास श्री भरत का जन्म न हुआ होता तो ক্রী ধ্ুংা কা जी काश्री रामचारित मानस ज्ञान यज्ञ हे॰ही उनका जीवन किसो भी समाज समस्त   धमों l1 का शुभारन्भ करने के लिए घन्यवाद  को आदर्श बना देने की पूर्ण क्षमता घारण करता भरत जीःका चरित्र एक अभिवादन  किया।  श्री भरत काजो चिन्तन है ऐसा आर्दश चरित्र है कि जिन भगवान रखता हे उनका अत उपस्थित भक्तगणाक बीचं प्रसाद वितरण  राम का नाम जप करके संतुष्ट होते  वह श्री अयोध्या को विश्व पटल पर सूर्य की किरणों के प्रकाश की भौँति है। रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ - ShareChat