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" #मोहब्बत मै खुद ही अपने दर्द का इलाज था। कब दूसरों की निगाह का मोहताज था। हमदर्दी-ए-अल्फ़ाज़ गैरों से क्या लेता। मेरी खुद्दारी को ये कहाँ बर्दाश्त था।