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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - दुनिया में संभलना हम भी जानते थे. पर ठोकर भी उसी पत्थर से लगी जिसे हम अपना मानते थे।। दुनिया में संभलना हम भी जानते थे. पर ठोकर भी उसी पत्थर से लगी जिसे हम अपना मानते थे।। - ShareChat