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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - खोल दे पंख मेरे , कहता है परिंदा अभी और उडान बाकी है ज़मीन नहीं है मंजिल मेरी , अभी पूरा आसमान बाकी है..!!! खोल दे पंख मेरे , कहता है परिंदा अभी और उडान बाकी है ज़मीन नहीं है मंजिल मेरी , अभी पूरा आसमान बाकी है..!!! - ShareChat