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https://sharechat.com/post/6W0wKG9?d=n&ui=gOXKMze #❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️अस्सलामु अलैकुम - ShareChat shahio ahmad शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? शबे-बारात ( १५ शाबान की रात ) मग़फ़िरत , रहमत और दुआ क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ॉर ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ें: सूरह यासीन (१ या 3 वाक़िआ या फिर जितना बन सके बार) - सूरह मुल्क - सूरह कुमआनन कीूरहिै तिलावत २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल (जितनी तौफ़ीक़ हो) हर 2 रकअत के बाद दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं, बस नफ़्ल पढ़़ें।  उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली  4 दुरूद शरीफ़़ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद 3|433/` > 5 तौबा और दुआ दिल से तौबा करें  करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी केचकै हॉ्ै तिम्मप नुेसुलामोनकीका फ़ी क़ालिदैनमज़िंदा हों  ६ अपने और दूसरों  मुस्ॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी, या इंतिक़ाल कर HIH परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत की दुआ  ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মুলম साबित नहीं। जो भी पढ़ें , मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें। फ़अफु अन्नी सुन्नत के के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन ( ज़िंदा हों ६ अपने और ೯ಾ}; चुके हो) तमाम मुसॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी, যা হনিক্ধাল বরয की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह रसूल से साबित नहीं। जो भी पढ़़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें। ShareChat shahio ahmad शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? शबे-बारात ( १५ शाबान की रात ) मग़फ़िरत , रहमत और दुआ क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ॉर ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ें: सूरह यासीन (१ या 3 वाक़िआ या फिर जितना बन सके बार) - सूरह मुल्क - सूरह कुमआनन कीूरहिै तिलावत २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल (जितनी तौफ़ीक़ हो) हर 2 रकअत के बाद दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं, बस नफ़्ल पढ़़ें।  उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली  4 दुरूद शरीफ़़ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद 3|433/` > 5 तौबा और दुआ दिल से तौबा करें  करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी केचकै हॉ्ै तिम्मप नुेसुलामोनकीका फ़ी क़ालिदैनमज़िंदा हों  ६ अपने और दूसरों  मुस्ॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी, या इंतिक़ाल कर HIH परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत की दुआ  ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মুলম साबित नहीं। जो भी पढ़ें , मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें। फ़अफु अन्नी सुन्नत के के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन ( ज़िंदा हों ६ अपने और ೯ಾ}; चुके हो) तमाम मुसॅलमानों की मग़फ़िरत बीमारी, যা হনিক্ধাল বরয की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह रसूल से साबित नहीं। जो भी पढ़़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़ें। - ShareChat