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#naat #naat sarif #masha allh #allh ki rehmat 🤲🤲🥰
naat - 1.28 PM 512 VoLIEiII रुला देने वाली नात शरीफ ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा मदीना बुला लीजिए सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को  है मुझ " ये दुनिया बहुत आज़माती को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआ मदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे-क़रारी न कट जाए आक़ा ! यूँही ' उम्र सारी कहाँ ज़िंदगानी का कुछ है पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुजूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना  गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी॰ सरकार-ए आली ! कहाँ जाए॰ आक़ा ! ये मँगता भला मदीना लीजिए बुला जहाँ के सभी ज़रें शम्स-ओ क़मर हैं जहाँ पे अबू-बक्र-ओ - उस्माँ, 'उमर हैं जहाँ जल्वा फ़रमा हैं हम्ज़ा चचा मदीना बुला लीजिए करम कर दिया है ये ख़्वाजा पिया ने जो मिस्रे' लिखे हैं शफ़ा' अत मियाँ ने करें दर-गुज़र जो हुई हो ख़तामदीना बुला लीजिए ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा मदीना बुला 1.28 PM 512 VoLIEiII रुला देने वाली नात शरीफ ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा मदीना बुला लीजिए सताती है मुझ को, रुलाती है मुझ को  है मुझ " ये दुनिया बहुत आज़माती को हूँ दुनिया की बातों से टूटा हुआ मदीना बुला लीजिए बड़ी बेकसी है, बड़ी बे-क़रारी न कट जाए आक़ा ! यूँही ' उम्र सारी कहाँ ज़िंदगानी का कुछ है पता मदीना बुला लीजिए ये एहसास है मुझ को, मैं हूँ कमीना हुजूर ! आप चाहें तो आऊँ मदीना  गुनाहों के दलदल में मैं हूँ फँसा मदीना बुला लीजिए मैं देखूँ वो रौज़ा, मैं देखूँ वो जाली बुला लीजे मुझ को भी॰ सरकार-ए आली ! कहाँ जाए॰ आक़ा ! ये मँगता भला मदीना लीजिए बुला जहाँ के सभी ज़रें शम्स-ओ क़मर हैं जहाँ पे अबू-बक्र-ओ - उस्माँ, 'उमर हैं जहाँ जल्वा फ़रमा हैं हम्ज़ा चचा मदीना बुला लीजिए करम कर दिया है ये ख़्वाजा पिया ने जो मिस्रे' लिखे हैं शफ़ा' अत मियाँ ने करें दर-गुज़र जो हुई हो ख़तामदीना बुला लीजिए ऐ ज़हरा के बाबा ! सुनें इल्तिजा मदीना बुला लीजिए कहीं मर न जाए तुम्हारा गदा मदीना बुला - ShareChat