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#*આપણે વિચારીશું ખરા?* #Islamic prayer #सोचने वाली बात #points to ponder #*let us understand our religion
*આપણે વિચારીશું ખરા?* - (2) जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) अपने पिता से जुदा हो गए, तो हज़रत याक़्रूब (अलैहिस्सलाम) ग़म की वजह से अपनी आँखों की रोशनी खो बैठे। ল্ধিন सब्र और ईमान को उन्होंने नहीं छोड़ा और कहाः ॰मैं अपनी तकलीफ़ और ग़म की शिकायत सिर्फ़ अल्लाह से करता 8/" और जब उन्होंने अपना मामला पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर दिया, तो अल्लाह ने यूसुफ़ को उन्हें लौटा दिया और अपनी रहमत से उनकी आँखों की रोशनी भी वापस कर दी। ऐ अल्लाह! मैं भी अपने सारे मामले सिर्फ़ तेरे हवाले करता हूँ। मेरे दिल की सब्र भरी उम्मीदों को खशखबरी में बदल दे। (2) जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) अपने पिता से जुदा हो गए, तो हज़रत याक़्रूब (अलैहिस्सलाम) ग़म की वजह से अपनी आँखों की रोशनी खो बैठे। ল্ধিন सब्र और ईमान को उन्होंने नहीं छोड़ा और कहाः ॰मैं अपनी तकलीफ़ और ग़म की शिकायत सिर्फ़ अल्लाह से करता 8/" और जब उन्होंने अपना मामला पूरी तरह अल्लाह के हवाले कर दिया, तो अल्लाह ने यूसुफ़ को उन्हें लौटा दिया और अपनी रहमत से उनकी आँखों की रोशनी भी वापस कर दी। ऐ अल्लाह! मैं भी अपने सारे मामले सिर्फ़ तेरे हवाले करता हूँ। मेरे दिल की सब्र भरी उम्मीदों को खशखबरी में बदल दे। - ShareChat