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#old #🌞 Good Morning🌞 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #✍मेरे पसंदीदा लेखक
old - व्यञ्जन माला गीत कबूतर करता गुटर गूँ ॰ खरगोश के सिर में खुजली क्यूँ ? गमले में हैं सुन्दर फूल , घड़ी कहे जाओ स्कूल।  चना चबाकर खाओ खूब तरी तानो जब हो धूप। जल में जाता बड़ा जहाज ,  झर-झर झरने की आवाज " टमाटर देखो गोल-्मटोल,  ठठेरा बनाये बर्तन गोल। डमरू बोला डम-्डम-्डम , ढम-्ढमा-ढम बाजे ढोल। तबला बोले तक-् तक-धिन , थपकी देती माँ हर दिन। दही , मलाई खा गई बिल्ली , धनिया , मटर चले अब दिल्ली।  नल का पानी बरफ की सिल्ली , पतंग उड़ी पीली आसमानी। लेकर आयी है नानी , बकरी पी गई सारी पानी।  a भवन बना है आलीशान , मछली की है पानी में जान। यज्ञ हवा " को करता शुद्ध   रथ पर राजा करत युद्ध। लड़की लड्डू-पूड़ी खाती , वन की छाया मन को भाती। शलजम , मूली , गाजर खाओ , पर्कोण का चित्र बनाओ। सरसों के हैं पीले फूल , हवा चली तो उड गई धूल। क्षमा करो प्रभु बालक जान   त्रयम्बकं का मन्त्र महान। ज्ञानी यही दिलाते याद   समय करो न तुम बर्बाद। व्यञ्जन माला गीत कबूतर करता गुटर गूँ ॰ खरगोश के सिर में खुजली क्यूँ ? गमले में हैं सुन्दर फूल , घड़ी कहे जाओ स्कूल।  चना चबाकर खाओ खूब तरी तानो जब हो धूप। जल में जाता बड़ा जहाज ,  झर-झर झरने की आवाज " टमाटर देखो गोल-्मटोल,  ठठेरा बनाये बर्तन गोल। डमरू बोला डम-्डम-्डम , ढम-्ढमा-ढम बाजे ढोल। तबला बोले तक-् तक-धिन , थपकी देती माँ हर दिन। दही , मलाई खा गई बिल्ली , धनिया , मटर चले अब दिल्ली।  नल का पानी बरफ की सिल्ली , पतंग उड़ी पीली आसमानी। लेकर आयी है नानी , बकरी पी गई सारी पानी।  a भवन बना है आलीशान , मछली की है पानी में जान। यज्ञ हवा " को करता शुद्ध   रथ पर राजा करत युद्ध। लड़की लड्डू-पूड़ी खाती , वन की छाया मन को भाती। शलजम , मूली , गाजर खाओ , पर्कोण का चित्र बनाओ। सरसों के हैं पीले फूल , हवा चली तो उड गई धूल। क्षमा करो प्रभु बालक जान   त्रयम्बकं का मन्त्र महान। ज्ञानी यही दिलाते याद   समय करो न तुम बर्बाद। - ShareChat