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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - दिल वहीं लोटना चाहता है जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं. ೧ बचपन , मासूमियत पुराना घर, पुराने दोस्त.. क्योकि 12 उम्र चाहे जितनी भी हो सुना हेःदिल पर कभी झुर्रियां नहीं पड़तीः (( दिल वहीं लोटना चाहता है जहां दुबारा जाना मुमकिन नहीं. ೧ बचपन , मासूमियत पुराना घर, पुराने दोस्त.. क्योकि 12 उम्र चाहे जितनी भी हो सुना हेःदिल पर कभी झुर्रियां नहीं पड़तीः (( - ShareChat