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#इस्लाम की बाते
इस्लाम - రక్క్నేటస్ لبص जिंदगी कै इस सफ़र मैं अब सब्र ही सबसै ध्यारा साथी है। किसी से कोईं उम्मीद नहीं, बस खामौशी का चुनाव कर लिया है, क्योंकि अब किसी से बहस करने की ताकत नहीं बची। ज़िंदगी का कुछ भरोसा नहीं, कब क्या हो जाए। बस मेरा ये अटूट यकीन है कि अगर मेरी नियत साफ़ है, तो मेरा अल्लाह भुझे वो सब ज़रूर देगा जिसकी मुझे आरज़ू है। इशल्लहा dqsq 0107 రక్క్నేటస్ لبص जिंदगी कै इस सफ़र मैं अब सब्र ही सबसै ध्यारा साथी है। किसी से कोईं उम्मीद नहीं, बस खामौशी का चुनाव कर लिया है, क्योंकि अब किसी से बहस करने की ताकत नहीं बची। ज़िंदगी का कुछ भरोसा नहीं, कब क्या हो जाए। बस मेरा ये अटूट यकीन है कि अगर मेरी नियत साफ़ है, तो मेरा अल्लाह भुझे वो सब ज़रूर देगा जिसकी मुझे आरज़ू है। इशल्लहा dqsq 0107 - ShareChat