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DJJS Ldh - चरैवेति Charaiveti हे पार्वती! जो कहें *यह जग अस्थिर, दुःख का धाम" जो सुनाएँ वैराग्य-पथ, मोह त्याग बनो निष्काम वे जग को जगाते निद्रा से, ममता की मृगतृष्णा सुनाएँ निदान न कर पाएँ सत्य पथ का बखान करें॰ पर जीवन विहित वे हैं जो संसार दुःख तो बहुत गिनाते हैं पर स्वयं फँसे , इसलिए निवृत्ति मार्ग न मिलाते हैं विहितगुर ೧OX fOldjjsworld आप अपनी स्वलिखित कविताओं को cc@djjs पर SHARE करें। org www djjs org CC-4321 चरैवेति Charaiveti हे पार्वती! जो कहें *यह जग अस्थिर, दुःख का धाम" जो सुनाएँ वैराग्य-पथ, मोह त्याग बनो निष्काम वे जग को जगाते निद्रा से, ममता की मृगतृष्णा सुनाएँ निदान न कर पाएँ सत्य पथ का बखान करें॰ पर जीवन विहित वे हैं जो संसार दुःख तो बहुत गिनाते हैं पर स्वयं फँसे , इसलिए निवृत्ति मार्ग न मिलाते हैं विहितगुर ೧OX fOldjjsworld आप अपनी स्वलिखित कविताओं को cc@djjs पर SHARE करें। org www djjs org CC-4321 - ShareChat