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##राजनितिक चर्चा #सच्ची बाते
#राजनितिक चर्चा - नेहरू जी की बहन विजय लक्ष्मी पंडित के शौक बहुत ख़र्चीले थे। एक बार वह शिमला के सर्किट हाउस में ठहरीं वहाँ रहने का बिल २५०० रुपए आया। किए बिना वहाँ से चली वह बिल का भुगतान आईं॰ तब हिमाचल प्रदेश नहीं बना था और शिमला पंजाब का हिस्सा होता था, तब भीमसेन सच्चर पंजाब के मुख्यमंत्री होते थे। उनके पास राज्यपाल चंदूलाल त्रिवेदी का पत्र आया कि २५०० रुपये की राशि को राज्य सरकार के विभिन्न खर्चों के तहत दिखला दिया जाए सच्चर के गले यह बात नहीं उतरी| उन्होंने विजय लक्ष्मी पंडित से तो कुछ नहीं हुए नेहरू को पत्र लिख कहा लेकिन झिझकते डाला कि वही बताएं कि इस पैसे का हिसाब किस मद में डाला जाए नेहरू ने तुरंत जवाब दिया कि इस बिल का भुगतान वह स्वयं கI उन्होंने यह भी लिखा कि वह एक मुश्त इतने पैसे नहीं दे सकते इसलिए वह पंजाब सरकार को पांच किश्तों में यह राशि ,नेहरू ने चुकाएंगे ; अपने निजी बैंक खाते से लगातार पांच महीनों तक पंजाब सरकार के पक्ष में पांच सौ रुपए के चेक काटे। एक यह भी भारत था मेरे प्यारे दोस्तों और एक आज का भारत है जहाँ एक विधायक उस क्षेत्र का खुदा समझता है खुद को पता है क्यों?क्योंकि आपने अपने मत की ताकत को बेच दिया है जिस दिन आपको लोकतंत्र की ताकत का अंदाजा हो जाएगा उस दिन आपको नेहरू जी के एक॰एक दिन के किये का समझ आएगा वो महज १७ साल प्रधानमंत्री रहे लेकिन पानी बिजली उद्योग शिक्षा स्वास्थ्य और भारत को विकसित करने के लिए सारे जतन कर दिए। महामानव @3 जी I1AA* विजयलक्ष्मी पण्डित पण्डित नेहरु जी की बहृन जब खर्चीली बहृन के २५०० रुपये के बिल का [ भुगतान अपने ही देश के प्रधानमंत्नी नें अपने हरी देश में 5 किस्तों में किया | ऐसा भी कोई था व्यक्तिल्व इस भारत में था जो बतौर हुए शिमला के सर्किट हॉउस में हुए अपनी प्रधानमन्ती होते बहन के खर्चे को अपनी तनख्वाह से पंजाब सरकार को चुकाया था। नेहरू जी की बहन विजय लक्ष्मी पंडित के शौक बहुत ख़र्चीले थे। एक बार वह शिमला के सर्किट हाउस में ठहरीं वहाँ रहने का बिल २५०० रुपए आया। किए बिना वहाँ से चली वह बिल का भुगतान आईं॰ तब हिमाचल प्रदेश नहीं बना था और शिमला पंजाब का हिस्सा होता था, तब भीमसेन सच्चर पंजाब के मुख्यमंत्री होते थे। उनके पास राज्यपाल चंदूलाल त्रिवेदी का पत्र आया कि २५०० रुपये की राशि को राज्य सरकार के विभिन्न खर्चों के तहत दिखला दिया जाए सच्चर के गले यह बात नहीं उतरी| उन्होंने विजय लक्ष्मी पंडित से तो कुछ नहीं हुए नेहरू को पत्र लिख कहा लेकिन झिझकते डाला कि वही बताएं कि इस पैसे का हिसाब किस मद में डाला जाए नेहरू ने तुरंत जवाब दिया कि इस बिल का भुगतान वह स्वयं கI उन्होंने यह भी लिखा कि वह एक मुश्त इतने पैसे नहीं दे सकते इसलिए वह पंजाब सरकार को पांच किश्तों में यह राशि ,नेहरू ने चुकाएंगे ; अपने निजी बैंक खाते से लगातार पांच महीनों तक पंजाब सरकार के पक्ष में पांच सौ रुपए के चेक काटे। एक यह भी भारत था मेरे प्यारे दोस्तों और एक आज का भारत है जहाँ एक विधायक उस क्षेत्र का खुदा समझता है खुद को पता है क्यों?क्योंकि आपने अपने मत की ताकत को बेच दिया है जिस दिन आपको लोकतंत्र की ताकत का अंदाजा हो जाएगा उस दिन आपको नेहरू जी के एक॰एक दिन के किये का समझ आएगा वो महज १७ साल प्रधानमंत्री रहे लेकिन पानी बिजली उद्योग शिक्षा स्वास्थ्य और भारत को विकसित करने के लिए सारे जतन कर दिए। महामानव @3 जी I1AA* विजयलक्ष्मी पण्डित पण्डित नेहरु जी की बहृन जब खर्चीली बहृन के २५०० रुपये के बिल का [ भुगतान अपने ही देश के प्रधानमंत्नी नें अपने हरी देश में 5 किस्तों में किया | ऐसा भी कोई था व्यक्तिल्व इस भारत में था जो बतौर हुए शिमला के सर्किट हॉउस में हुए अपनी प्रधानमन्ती होते बहन के खर्चे को अपनी तनख्वाह से पंजाब सरकार को चुकाया था। - ShareChat