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#☪ सूफी संगीत 🕌 #❤️अस्सलामु अलैकुम #shabe barat 🤲🏻🕋 #shabe barat Mubarak ho aap sabhi ko #shbhan allah
☪ सूफी संगीत 🕌 - 9>>^ शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? शबे-बारात (१५ शाबान की रात) मग़फ़िरत, रहमत और दुआ क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ार ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ें: सूरह यासीन (१ या 3 बार) - सूरह मुल्क - सूरह रहमान - सूरहू वाक़िआ या फिर जितना बन सके ক্তস্সোন ক্ী নিলাবন| २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल (जितनी तौफ़ीक़ हो) हर 2 रकअत के बाद दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं , बस नफ़्ल पढ़़ें।  उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली  4 दुरूद शरीफ़ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद और ये दुआ  > ५ तौबा और दुआ दिल से तौबा करें  करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी  केचलै हौँतमाममुसुलामीन ६ अपने और दूसरों के लिए की माफ़ी वालिदैन (ज़िंदा हों मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी, या इंतिक़ाल कर तमाम की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মুলম साबित नहीं। जो भी पढ़ें , मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें । फ़अफु अन्नी सुन्नत के के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन ( ज़िंदा हों ६ अपने और  दूसरों  या इंतिक़ाल कर चुके हो ) तमाम मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी , की दुआ " परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह रसूल से साबित नहीं। जो भी पढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें। 9>>^ शबे-बारात में क्या पढ़ना चाहिए? शबे-बारात (१५ शाबान की रात) मग़फ़िरत, रहमत और दुआ क़बूल होने की रात है। इस रात में नफ़्ल इबादत, दुआ और इस्तिग़फ़ार ज़्यादा करना चाहिए। )१ कुरआन की तिलावत जो आसानी हो उतना पढ़़ें: सूरह यासीन (१ या 3 बार) - सूरह मुल्क - सूरह रहमान - सूरहू वाक़िआ या फिर जितना बन सके ক্তস্সোন ক্ী নিলাবন| २ नफ़्ल नमाज़ 2 या 4 रकअत नफ़्ल (जितनी तौफ़ीक़ हो) हर 2 रकअत के बाद दुआ करें। कोई ख़ास तय नमाज़ साबित नहीं , बस नफ़्ल पढ़़ें।  उ इस्तिग़फ़ार ( गुनाहों की माफी) कम से कम १०० बारः अस्तग़फिरुल्लाह रब्बी मिन जंबिन व अतूबु इलैह कुल्ली  4 दुरूद शरीफ़ कम से कम १०० बारः अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व अला आलि मुहम्मद और ये दुआ  > ५ तौबा और दुआ दिल से तौबा करें  करेंः अल्लाहुम्मा इन्नका  अप्रूव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफु अन्नी  केचलै हौँतमाममुसुलामीन ६ अपने और दूसरों के लिए की माफ़ी वालिदैन (ज़िंदा हों मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी, या इंतिक़ाल कर तमाम की दुआ  परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह মুলম साबित नहीं। जो भी पढ़ें , मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें । फ़अफु अन्नी सुन्नत के के लिए दुआ अपने गुनाहों की माफ़ी वालिदैन ( ज़िंदा हों ६ अपने और  दूसरों  या इंतिक़ाल कर चुके हो ) तमाम मुस्लमानों की मग़फ़िरत बीमारी , की दुआ " परेशानियों और रिज़्क़ में बरकत ज़रूरी बात शबे-बारात में कोई ख़ास तय नमाज़ या ख़ास सूरह रसूल से साबित नहीं। जो भी पढ़ें , सुन्नत के मुताबिक़, सादगी से पढ़़ें। - ShareChat