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#✍️ साहित्य एवं शायरी #एक रचना रोज़✍
✍️ साहित्य एवं शायरी - शक्ती हीन, दीशा हीन खराब स्थिती को निर्मित | ক্িনু करके कीं कर्तव्य हो जाते हैं जिनका अपना  ( स्वयं)का कर्म है वो स्थाई है, जैसे शक्तीयां उनकी दीशा कोई नहीं बदल सकता থোৎ মনলন ওল তী Il कभी साधारण हो ही नहीं सकता तीसरा जिक्र है स्थीत आप जहां है तय कीजिए क्या वहा आपका कोई (अपना) कर्म है मीत्र असल मे अपना कर्म ही अटल होता है | जिनके कारण ये तीनो चीजें हैं स्थीत, स्थिती और स्थाई शक्ती हीन, दीशा हीन खराब स्थिती को निर्मित | ক্িনু करके कीं कर्तव्य हो जाते हैं जिनका अपना  ( स्वयं)का कर्म है वो स्थाई है, जैसे शक्तीयां उनकी दीशा कोई नहीं बदल सकता থোৎ মনলন ওল তী Il कभी साधारण हो ही नहीं सकता तीसरा जिक्र है स्थीत आप जहां है तय कीजिए क्या वहा आपका कोई (अपना) कर्म है मीत्र असल मे अपना कर्म ही अटल होता है | जिनके कारण ये तीनो चीजें हैं स्थीत, स्थिती और स्थाई - ShareChat