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#📖 कविता और कोट्स✒️ #📒 मेरी डायरी #📜मेरी कलम से✒️ #🕊️ ऊंची उड़ान 🏃 #💔 हमारी भावनाऐं ❤️
📖 कविता और कोट्स✒️ - बाज़ार से गुजरा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ , सजदे में झुका हूँ गुनहगार नहीं हूँ . अपनी सियासत अपने पास रखो मैं किसी ओहदे का तलबगार नहीं हूँ , ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे ये मत पूछना किस-किस ने धोखा दिया, वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाएँगे ... बाज़ार से गुजरा हूँ, ख़रीददार नहीं हूँ , सजदे में झुका हूँ गुनहगार नहीं हूँ . अपनी सियासत अपने पास रखो मैं किसी ओहदे का तलबगार नहीं हूँ , ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे ये मत पूछना किस-किस ने धोखा दिया, वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाएँगे ... - ShareChat