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#chandra shekhar azad puniyatithi 27 February #💐चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि💐 #🇮🇳चंद्रशेखर आजाद पुण्यतिथि 🙏🏻 #📢 27 फरवरी के अपडेट 🗞️ #🎤 आज के दिन का इतिहास
chandra shekhar azad puniyatithi 27 February - मा भारती के वीर सपूत " करीव २० मिनट तक मातृभूमिकी स््तत्रता के लिए पुलिस से मुकाबला  अपने प्राणो की आहुति देनेवाले करते रहे। आजाद की महान क्रांतिकारी अमरबलिदानी पिस्तोल मे आखिरी गोली बची तो उन्होने चंद्रशेखर खुद पर चला दी।  आजाद जी बह अक्सर कहा करते थेन की पुण्यतिथि पर सादरनमन दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे  आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे।  आज के दिन का इतिहास चंद्रशेखर आजाद का সল্স 23 সুলাৎ 1906 কী मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले  WW मेभाबरा गांच मे हुआ था। उनका  चन्द्रशैखरआजाद नाम चंद्रशेखर तिवारी था। १९२१ मे महात्मा गांधी के असहयोग  आंदोलन से जुड़ने के बाद  का शहादत उनकी गिरफतारी हुई।  जव उन्हे जज कि सामने पश किया गयाताउनसे उनका  नाम पूछा गया, चंद्रशेखर ने अपना नाम आजाद और अपने पिता का नाम মনমনা ননামা হম वात से नाराज होकर जज ने चंदशखर को १५ कोडे मारने की सुनाई।  सजी चंद्रशेखर आजाद की यह पिस्तौल चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद म्यूजियम  में खखी है। २३ जुलाई १९०६ - २७ फरवरी १९३१  आज ही के दिन २७ फरवरी १९३१ को करांतिकारी चंद्रशेखर दुश्मन की गोलियों आजाद इलाहावाद कै अल्फ्रैड पार्क मैं व्रिटिश पुलिस  से मुठभेड़ के दारान शहीद हुए थे। काहम साभन करेंगे आज़ाद वह अपने साथियों  ह्वी रहे हैं आज़ाद के बठक कर साथ रहेथे तभी अंग्रेज ही रहेंगे पुलिस ने चारो और  ম্ঘংলিমরা] সাসান ने अपनै साथियो को  चंद्रशेरवर शेखर आजाट पाक स बाहर २३ जुलाई १९०६  निकाल दिया मा भारती के वीर सपूत " करीव २० मिनट तक मातृभूमिकी स््तत्रता के लिए पुलिस से मुकाबला  अपने प्राणो की आहुति देनेवाले करते रहे। आजाद की महान क्रांतिकारी अमरबलिदानी पिस्तोल मे आखिरी गोली बची तो उन्होने चंद्रशेखर खुद पर चला दी।  आजाद जी बह अक्सर कहा करते थेन की पुण्यतिथि पर सादरनमन दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे  आजाद ही रहे हैं आजाद ही रहेंगे।  आज के दिन का इतिहास चंद्रशेखर आजाद का সল্স 23 সুলাৎ 1906 কী मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले  WW मेभाबरा गांच मे हुआ था। उनका  चन्द्रशैखरआजाद नाम चंद्रशेखर तिवारी था। १९२१ मे महात्मा गांधी के असहयोग  आंदोलन से जुड़ने के बाद  का शहादत उनकी गिरफतारी हुई।  जव उन्हे जज कि सामने पश किया गयाताउनसे उनका  नाम पूछा गया, चंद्रशेखर ने अपना नाम आजाद और अपने पिता का नाम মনমনা ননামা হম वात से नाराज होकर जज ने चंदशखर को १५ कोडे मारने की सुनाई।  सजी चंद्रशेखर आजाद की यह पिस्तौल चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद म्यूजियम  में खखी है। २३ जुलाई १९०६ - २७ फरवरी १९३१  आज ही के दिन २७ फरवरी १९३१ को करांतिकारी चंद्रशेखर दुश्मन की गोलियों आजाद इलाहावाद कै अल्फ्रैड पार्क मैं व्रिटिश पुलिस  से मुठभेड़ के दारान शहीद हुए थे। काहम साभन करेंगे आज़ाद वह अपने साथियों  ह्वी रहे हैं आज़ाद के बठक कर साथ रहेथे तभी अंग्रेज ही रहेंगे पुलिस ने चारो और  ম্ঘংলিমরা] সাসান ने अपनै साथियो को  चंद्रशेरवर शेखर आजाट पाक स बाहर २३ जुलाई १९०६  निकाल दिया - ShareChat