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इज़्ज़त का दरवाज़ा इतना छोटा होता है, कि उसमें दाखिल होने से पहले सर झुकाना पड़ता है..... जो अकड़ लेकर चलता है, वो बाहर ही रह जाता है, अहंकार का बोझ अक्सर राह भुला जाता है नम्रता के कदम जहाँ पड़ते हैं चुपचाप, वहीं........ दिलों में खुल जाते हैं भरोसे के ख़्वाब इज़्ज़त ऊँचाई से नहीं, झुकने से मिलती है.....!!😥💯 #🎥 ਵੀਡੀਓ ਸਟੇਟਸ #🧾 ਟੈਕਸਟ ਸ਼ਾਇਰੀ #💓ਸਿਰਫ ਤੇਰੇ ਲਈ #📄 ਜੀਵਨ ਬਾਣੀ #📃ਲਾਈਫ ਕੋਟਸ✒️
🎥 ਵੀਡੀਓ ਸਟੇਟਸ - इफ़्ज़त का दरवाज़ा इतना छौटा हौता हरै, कि उसमें दाखिल होने से पहले सर झुकाना पडता है॰ = जो अकड़ लेकर चलता ह्ै, चो बाहर ही रह जाता है॰ अहंकार का बोझ अक्सर राह भुला जाता है క్తే नम्रता के कदम जहाँ पड़ते हैं चुपचाप , वहीं. दिलों में खुल जाते हैं भरोसे के ख़्वाब इज़्ज़त ऊँचाई से नहीं, से मिलती है.....!! झुकने writer_mahendra इफ़्ज़त का दरवाज़ा इतना छौटा हौता हरै, कि उसमें दाखिल होने से पहले सर झुकाना पडता है॰ = जो अकड़ लेकर चलता ह्ै, चो बाहर ही रह जाता है॰ अहंकार का बोझ अक्सर राह भुला जाता है క్తే नम्रता के कदम जहाँ पड़ते हैं चुपचाप , वहीं. दिलों में खुल जाते हैं भरोसे के ख़्वाब इज़्ज़त ऊँचाई से नहीं, से मिलती है.....!! झुकने writer_mahendra - ShareChat