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#🙏 प्रेरणादायक विचार #🗣कबीर अमृतवाणी📢 #👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #🙏सुविचार📿
🙏 प्रेरणादायक विचार - ಪಹಪರೊೈ कबीर , क्षमा समान न तप सुख नर्ही संतोष समान। तृष्णा समान नर्हीं ब्याधी कोई, धर्म न दया समान। | भावार्थः कबीर साहेब जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नहीं है। संतोष के तुल्य कोई सुख नहीं है। किसी সাদি எழகி की इच्छा के कोई आपदा समान नहीं है और दया के # समान नहीं है। ಪಹಪರೊೈ कबीर , क्षमा समान न तप सुख नर्ही संतोष समान। तृष्णा समान नर्हीं ब्याधी कोई, धर्म न दया समान। | भावार्थः कबीर साहेब जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नहीं है। संतोष के तुल्य कोई सुख नहीं है। किसी সাদি எழகி की इच्छा के कोई आपदा समान नहीं है और दया के # समान नहीं है। - ShareChat