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तृष्णा - दुख का मुल 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 जातिपि दुक्खा , जरापि दुक्खा , व्याधिपि दुक्खो , मरणम्पि दुक्खं , अप्पियेहि सम्पयोगो दुक्खो , पियेहि विप्पयोगो दुक्खो , यम्पिच्छं न लभति तम्पि दुक्खं-सङ्खित्तेन पञ्चुपादानक्खन्धा दुक्खा । 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 जन्म भी दु:ख हे , बुढ़ापा भी दु:ख है , रोग भी दु:ख है , मरण भी दु:ख है । अप्रिय (व्यक्तियों , वस्तुओं , स्थितियों) का संयोग दु:ख है , प्रिय ((व्यक्तियों , वस्तुओं , स्थितियों) का वियोग दु:ख है , मनचाहे खान पान भी दु:ख है ; संक्षेप में कहे तो उपादान (याने , आसक्ति) पर आधारित पंच-स्कंधों की यह जीवनधारा ही दु:ख है । 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 #🙏🪷☸️साधु साधु साधु ☸️🪷🙏 #☸️साधु साधु साधु ☸️ #☸️🪷 उपोसत 🪷☸️ #उपोसत #🪷 उपोसत 🪷
🙏🪷☸️साधु साधु साधु ☸️🪷🙏 - ShareChat