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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी #✍गुलजारांचे साहित्य
📝कविता / शायरी/ चारोळी - खा कर ठोकर जमाने की फिर लोट आये मयखाने में, मुझे देखकर मेरे ग़म बोले बड़ी देर लगा दी आने में. ೦೦೦o खा कर ठोकर जमाने की फिर लोट आये मयखाने में, मुझे देखकर मेरे ग़म बोले बड़ी देर लगा दी आने में. ೦೦೦o - ShareChat