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#❤️जीवन की सीख #🌞 Good Morning🌞 #☝ मेरे विचार #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस
❤️जीवन की सीख - क्या खूब लिखा है किसी ने प्यास लगी थी गजब की मगर पानी मे पीते तोमर जाते ओर ना पीते तो भी मर जाते बस यही जहर था तो मसले जिंदगी भर ना हल हुए ना नींद पूरी हुई ना ख्वाब मुकम्मल हुए वक़्त ने कहाँ कांश थोड़ा ओर सब्न होता ओर सब्र ने कहाँ कांश थोड़ा ओर वक़्त होता सुबह सुबह उठना पड़ता हैं कमाने के लिए साहब आराम कमाने निकलता हु आराम छोड़कर उनर सड़को पर तमाशा करता हैं ओर किस्मत महलो मे राज करती हैं शिकायते तो बहुत हैं हुजसे ऐ जिंदगी पर भी बहुता चुप इस लिए हु जो दिया तूने मुझे वो को नसीब नहीं होता अजीब सौदागर हैं ये वक़्त भी जवानी का लालच दे कर बसपन ले गया अब अमीरी की लालच दे कर जवानी ले जायेगा लौट आता हु रोज घर की तरफ थका हारा आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हु या काम करने के लिए जीता हु " थक गया हु नौकरी से ऐ जिंदगी मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे भरी 57 जेब ने दुनिया की पहसान करवाई हैं ओर खाली जेब ने अपनो की लगे पैसा कमाने तब समझ मे आया शौक तो माँ बाप के पेसो G@ से,पुरे होते थे अपने पेसो से तो सिर्फ जरूरते पूरी होती हैं हसने की इसा ना होतो भी हसना पड़ता हैं जब कोई पुसे कैसे हो तो मजे मे हु केहना पड़ता हैं जिंदगी का रंग मंच है दोस्तों यहां हर किसीको नाटक करना पड़ता हैं माचीस की जरुरत यहां नहीं पडती यहां आदमी आदमी से जलता हैं दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक ढूंढ रहे है की मंगल ग्रह पर जमीन हैं यहा नहीं पर आदमी ये नहीं ढूंढ रहा है की जीवन मे मंगल हैं या नहीं लेखक कैलाश कुमार जोगावत क्या खूब लिखा है किसी ने प्यास लगी थी गजब की मगर पानी मे पीते तोमर जाते ओर ना पीते तो भी मर जाते बस यही जहर था तो मसले जिंदगी भर ना हल हुए ना नींद पूरी हुई ना ख्वाब मुकम्मल हुए वक़्त ने कहाँ कांश थोड़ा ओर सब्न होता ओर सब्र ने कहाँ कांश थोड़ा ओर वक़्त होता सुबह सुबह उठना पड़ता हैं कमाने के लिए साहब आराम कमाने निकलता हु आराम छोड़कर उनर सड़को पर तमाशा करता हैं ओर किस्मत महलो मे राज करती हैं शिकायते तो बहुत हैं हुजसे ऐ जिंदगी पर भी बहुता चुप इस लिए हु जो दिया तूने मुझे वो को नसीब नहीं होता अजीब सौदागर हैं ये वक़्त भी जवानी का लालच दे कर बसपन ले गया अब अमीरी की लालच दे कर जवानी ले जायेगा लौट आता हु रोज घर की तरफ थका हारा आज तक समझ नहीं आया की जीने के लिए काम करता हु या काम करने के लिए जीता हु " थक गया हु नौकरी से ऐ जिंदगी मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे भरी 57 जेब ने दुनिया की पहसान करवाई हैं ओर खाली जेब ने अपनो की लगे पैसा कमाने तब समझ मे आया शौक तो माँ बाप के पेसो G@ से,पुरे होते थे अपने पेसो से तो सिर्फ जरूरते पूरी होती हैं हसने की इसा ना होतो भी हसना पड़ता हैं जब कोई पुसे कैसे हो तो मजे मे हु केहना पड़ता हैं जिंदगी का रंग मंच है दोस्तों यहां हर किसीको नाटक करना पड़ता हैं माचीस की जरुरत यहां नहीं पडती यहां आदमी आदमी से जलता हैं दुनिया के बड़े बड़े वैज्ञानिक ढूंढ रहे है की मंगल ग्रह पर जमीन हैं यहा नहीं पर आदमी ये नहीं ढूंढ रहा है की जीवन मे मंगल हैं या नहीं लेखक कैलाश कुमार जोगावत - ShareChat