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#जय श्री राम#जय श्री राम#राम राम जी #रामायण #रामायण ज्ञान
जय श्री राम - *वन्दे वानरयूथानां रामस्य दयिताननम् | 1. रूक्षोरुजानुं रुंदकक्षं रामं रघुवरं स्मराम्यहम् |I* अर्थः मैं राम के चरणों में वंदना करता हूँ, जो वानरों के समूह से घिरे हुए हैं , जिनकी जंघाएँ विस्तृत  विशाल हैं, और जिनका कक्ष 81 *न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते | 2. तत् स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति |I* ४.३८, रामायण में भी उल्लेखित) (শীনা अर्थः ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कोई नहीं है, जो योग से सिद्ध हुआ है, वह समय के साथ अपने आत्मा में ही पाता है। মর্ব মল্ু নিযসমা: | *सर्वे भवन्तु 3. सुखिनः भवेत्| सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् ||* हों , सभी निरोग हों, सभी अर्थः सभी सुखी कल्याण देखें , कोई भी दुःखी न हो। 4. जय राम जय राम जय जय राम *वन्दे वानरयूथानां रामस्य दयिताननम् | 1. रूक्षोरुजानुं रुंदकक्षं रामं रघुवरं स्मराम्यहम् |I* अर्थः मैं राम के चरणों में वंदना करता हूँ, जो वानरों के समूह से घिरे हुए हैं , जिनकी जंघाएँ विस्तृत  विशाल हैं, और जिनका कक्ष 81 *न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते | 2. तत् स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति |I* ४.३८, रामायण में भी उल्लेखित) (শীনা अर्थः ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कोई नहीं है, जो योग से सिद्ध हुआ है, वह समय के साथ अपने आत्मा में ही पाता है। মর্ব মল্ু নিযসমা: | *सर्वे भवन्तु 3. सुखिनः भवेत्| सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग् ||* हों , सभी निरोग हों, सभी अर्थः सभी सुखी कल्याण देखें , कोई भी दुःखी न हो। 4. जय राम जय राम जय जय राम - ShareChat