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#🖋शेरो-शायरी #📝कविता / शायरी/ चारोळी #✍गुलजारांचे साहित्य
🖋शेरो-शायरी - 0 आशियाने बनाएं भी तो कहां बनाएं "साहब" ज़मीने महंगी हो गयी और दिल में कोई जगह नहीं देता !! 0 0 आशियाने बनाएं भी तो कहां बनाएं "साहब" ज़मीने महंगी हो गयी और दिल में कोई जगह नहीं देता !! 0 - ShareChat