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प्राचीन विज्ञानाचा चमत्कार: विद्याशंकर मंदिर कर्नाटकातील शृंगेरी येथे असलेले विद्याशंकर मंदिर हे भारतीय प्राचीन अभियांत्रिकी आणि खगोलशास्त्राचे एक अद्भूत उदाहरण आहे. या मंदिराच्या मंडपात १२ राशींचे प्रतिनिधित्व करणारे १२ खांब अशा प्रकारे कोरले आहेत की, प्रत्येक सौर महिन्याच्या सुरुवातीला सूर्याचे पहिले किरण नेमके त्याच राशीच्या खांबावर पडतात. ६०० वर्षांपूर्वी कोणत्याही आधुनिक सेन्सर किंवा मशिनशिवाय केवळ दगडांच्या अचूक कोनांचा वापर करून साधलेला हा 'प्रकाशोत्सव' आजही आधुनिक वास्तुविशारदांना थक्क करतो. आपल्या पूर्वजांच्या प्रगत ज्ञानाची साक्ष देणारे हे मंदिर खरोखरच अभिमानास्पद आहे. 🙏🏻 #✍️ विचार
✍️ विचार - श्रृंगेरी में स्थित विद्यारशकर मंदिर प्राचीनाइंजीनियरिंजओर खगोल विज्ञान का चमत्कार हे। इस मंदिर में १२ खंभे हें जिन पर १२ राशियाँ बनी हैं। चमत्कार यह हे कि सूरज की पहली किरण सिर्फ उसी खभे पर गिरती ह जिस राशि का महीना चल रहा होता ह। जेसे ही महीना बदलता हे सूर्यकी किरणें अपने आप अगले खंभे पर शिफ्ट हो जाती हें। बिना किसी मशीन या सेंसर के G०० साल पत्थरों को পমল इतनी सटीक डिग्री पर केसे सेट किया गया यह आधुनिक आरकिटेक्ट्सकी समझसे बाहरहे। श्रृंगेरी में स्थित विद्यारशकर मंदिर प्राचीनाइंजीनियरिंजओर खगोल विज्ञान का चमत्कार हे। इस मंदिर में १२ खंभे हें जिन पर १२ राशियाँ बनी हैं। चमत्कार यह हे कि सूरज की पहली किरण सिर्फ उसी खभे पर गिरती ह जिस राशि का महीना चल रहा होता ह। जेसे ही महीना बदलता हे सूर्यकी किरणें अपने आप अगले खंभे पर शिफ्ट हो जाती हें। बिना किसी मशीन या सेंसर के G०० साल पत्थरों को পমল इतनी सटीक डिग्री पर केसे सेट किया गया यह आधुनिक आरकिटेक्ट्सकी समझसे बाहरहे। - ShareChat