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#poem #self thought
poem - True lines : चलो हंसने की कोई, ढूंढते , గT qగ जिधर न हो कोई ग़म, वो जगह ढूंढते हैं बहुत उड़ लिए ऊंचे आसमानों में यारो, चलो जमीं पे ही कहीं, గ్గ ढूंढते हम सतह छूटा संग कितनों का ज़िंदगी की जंग में, चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं। बहुत वक़्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में, ढूंढते हैं! चलो अँधेरी रात की, हम सुबह True lines : चलो हंसने की कोई, ढूंढते , గT qగ जिधर न हो कोई ग़म, वो जगह ढूंढते हैं बहुत उड़ लिए ऊंचे आसमानों में यारो, चलो जमीं पे ही कहीं, గ్గ ढूंढते हम सतह छूटा संग कितनों का ज़िंदगी की जंग में, चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं। बहुत वक़्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में, ढूंढते हैं! चलो अँधेरी रात की, हम सुबह - ShareChat