ShareChat
click to see wallet page
search
इक दर्द के आलम में मुस्कराने चला था अपने जख्मो पर मरहम लगाने चला था जिसने दिए थे हमें जख्म जिंदगी के लिए उनको ही दाग दिल का दिखाने चला था ।। दिल भी टूट जाने से बिखर जाता है हाथ रख दो फिर से सवंर जाता है आईने से अपनी सूरत छुपा के आया हूँ देखते ही खुद ये चेहरा उतर जाता है #જીવનગાથા #👌બેસ્ટ સ્ટેટ્સ📱 #📱વ્હોટ્સએપ સ્ટેટ્સ📱
જીવનગાથા - shayarinet com मुशाफिर हूँ कोई ठिकाना न रहा A हूँ दूर किसी बिराने में बसर करता मै महफ़िल की ख्वाहिस में था कभी अब चाहत ही न रही इस दीवाने में | shayarinet com मुशाफिर हूँ कोई ठिकाना न रहा A हूँ दूर किसी बिराने में बसर करता मै महफ़िल की ख्वाहिस में था कभी अब चाहत ही न रही इस दीवाने में | - ShareChat