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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ।सीतापुर साहित्य सृजन संस्थान -पजी. बिसवा  [ सृजन के सारथी सृजन पुस्तकालय   दैनिक राष्ट्राज्य की प्रस्तुति মীনাসুব  बिसर्वो सीत तेरे रंग में रंगना चाहूं आई पुरवा मधुर सुहावन बहती है या कुछ कहती है। बहुत दिनों से तुम नही आए॰ सनन सनन कर यह कहती है। माघ गया और फागुन आया,संग बहारें अपने लाया| पर जाने कब दिन वो होगा कोई कहे अब तूभी आया।। बीत गए जाने कितने फागुन तुझको मेरी याद न आई। ಞT ಕ है मौसम बिरहाग्नि ने बहुत जलाई। सब पपीहा बोल बोल कर अपने मन की अगन बुझाए। ஈ तरह क्या उसके पिया ने भी अपनी यादों से उसे जलाए। क्या यह भी फागुन ऐसे ही तेरे बिन यूं॰हो जायेगा | हे मनमोहन अब तो आजा क्या अब न आयेगा | 7 मांगू मैं। इस होली में कुछ न मांगू बस तुझसे इतना अपने रंग में रंग ले ये कान्हा बस इतना ही चाहूं मैं।। तू मेरे सामने होगा। जाने कब ऐसा दिन होगा जब फिरसे वही मुस्कान मिलेगी जब तू मेरा आईना होगा।। सोनम सिंह चौहान सीतापुर रामपुर कलां ।सीतापुर साहित्य सृजन संस्थान -पजी. बिसवा  [ सृजन के सारथी सृजन पुस्तकालय   दैनिक राष्ट्राज्य की प्रस्तुति মীনাসুব  बिसर्वो सीत तेरे रंग में रंगना चाहूं आई पुरवा मधुर सुहावन बहती है या कुछ कहती है। बहुत दिनों से तुम नही आए॰ सनन सनन कर यह कहती है। माघ गया और फागुन आया,संग बहारें अपने लाया| पर जाने कब दिन वो होगा कोई कहे अब तूभी आया।। बीत गए जाने कितने फागुन तुझको मेरी याद न आई। ಞT ಕ है मौसम बिरहाग्नि ने बहुत जलाई। सब पपीहा बोल बोल कर अपने मन की अगन बुझाए। ஈ तरह क्या उसके पिया ने भी अपनी यादों से उसे जलाए। क्या यह भी फागुन ऐसे ही तेरे बिन यूं॰हो जायेगा | हे मनमोहन अब तो आजा क्या अब न आयेगा | 7 मांगू मैं। इस होली में कुछ न मांगू बस तुझसे इतना अपने रंग में रंग ले ये कान्हा बस इतना ही चाहूं मैं।। तू मेरे सामने होगा। जाने कब ऐसा दिन होगा जब फिरसे वही मुस्कान मिलेगी जब तू मेरा आईना होगा।। सोनम सिंह चौहान सीतापुर रामपुर कलां - ShareChat