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श्रीमद्भागबतम् - SB 1.11.25 नित्यं निरीक्षमाणानां यदपि द्वारकौकसाम् [ वितृप्यन्ति हि दृशः श्रियो धामाङ्गमच्युतम् II २५ 7 श्रीमद्भागबतम् Synonyms नित्यम्- नियमित रूप से, सदैव; निरीक्षमाणानाम् : उनको देखनेवालों का; यत् के होते हुए; द्वारका- ٦٤٩; 3٨٨٩ ओकसाम्  द्वारका के निवासी; न- कभी नहीं; वितृष्यन्ति तुष्ट ठीक से; दृशः- दृश्य; श्रियः- सौन्दर्यः धाम- अङ्गम् : होते हैं; हि शरीर रूपी आगार; अच्युतम्  अमोघ | Translation द्वारकावासी समस्त सौन्दर्य के आगार अच्युत भगवान् को नित्य निहारने के अभ्यस्त थे,फिर भी वे कभी तृप्त नहीं होते थे। SB 1.11.25 नित्यं निरीक्षमाणानां यदपि द्वारकौकसाम् [ वितृप्यन्ति हि दृशः श्रियो धामाङ्गमच्युतम् II २५ 7 श्रीमद्भागबतम् Synonyms नित्यम्- नियमित रूप से, सदैव; निरीक्षमाणानाम् : उनको देखनेवालों का; यत् के होते हुए; द्वारका- ٦٤٩; 3٨٨٩ ओकसाम्  द्वारका के निवासी; न- कभी नहीं; वितृष्यन्ति तुष्ट ठीक से; दृशः- दृश्य; श्रियः- सौन्दर्यः धाम- अङ्गम् : होते हैं; हि शरीर रूपी आगार; अच्युतम्  अमोघ | Translation द्वारकावासी समस्त सौन्दर्य के आगार अच्युत भगवान् को नित्य निहारने के अभ्यस्त थे,फिर भी वे कभी तृप्त नहीं होते थे। - ShareChat